श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २९

हनुमत-स्तुति · पद २९ / २७९

जयति निर्भरानंद-संदोह कपिकेसरी,केसरी-सुवन भुवनैकभर्ता।

दिव्यभूम्यंजना-मंजुलाकर-मणे,भक्त-संताप-चिंतापहर्ता ॥ १ ॥

जयति धमार्थ-कामापवर्गद,विभो ब्रह्मलोकादि-वैभव-विरागी।

वचन-मानस-कर्म सत्य-धर्मव्रती,जानकीनाथ-चरणानुरागी ॥ २ ॥

जयति बिहगेश-बलबुद्धि-बेगाति-मद-मथन,मनमथ-मथन,ऊर्ध्वरेता।

महानाटक-निपुन,कोटि-कविकुल-तिलक,गानगुण-गर्व-गंधर्व-जेता ॥ ३ ॥

जयति मंदोदरी-केश-कर्षण,विद्यमान दशकंठ भट-मुकुट मानी।

भूमिजा-दुःख-संजात रोषांतकृत-जातनाजंतु कृत जातुधानी ॥ ४ ॥

जयति रामायण-श्रवण-संजात-रोमांच,लोचन सजल, शिथिल वाणी।

रामपदपद्म-मकरंद-मधुकर पाहि,दास तुलसी शरण,शूलपाणी ॥ ५ ॥