श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 30

हनुमत-स्तुति · राग सारंग · पद 30 / 279

जाके गति है हनुमानकी।

ताकी पैज पूजि आई, यह रेखा कुलिस पषानकी ॥ 1 ॥

अघटित-घटन, सुघट-बिघटन,ऐसी बिरुदावलि नहिं आनकी।

सुमिरत संकट-सोच-बिमोचन, मूरति मोद-निधानकी ॥ 2 ॥

तापर सानुकूल गिरिजा, हर, लषन, राम अरु जानकी।

तुलसी कपिकी कृपा-बिलोकनि, खानि सकल कल्यानकी ॥ 3 ॥