श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ३

शिव स्तुति · पद ३ / २७९

को जाँचिये संभु तजि आन।

दीनदयालु भगत-आरति-हर,सब प्रकार समरथ भगवान ॥ १ ॥

कालकूट-जुर जरत सुरासुर,निज पन लागि किये बिष पान।

दारुन दनुज,जगत-दुखदायक, मारेउ त्रिपुर एक ही बान ॥ २ ॥

जो गति अगम महामुनि दुर्लभ,कहत संत,श्रुति,सकल पुरान।

सो गति मरन-काल अपने पुर, देत सदासिव सबहिं समान ॥ ३ ॥

सेवत सुलभ,उदार कलपतरु,पारबती-पति परम सुजान।

देहु काम-रिपु राम-चरन-रति,तुलसिदास कहँ कृपानिधान ॥ ४ ॥