श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ३१

हनुमत-स्तुति · राग गौरी · पद ३१ / २७९

ताकिहै तमकि ताकी ओर को।

जाको है सब भाँति भरोसो कपि केसरी-किसोरको ॥ १ ॥

जन-रंजन अरिगिन-गंजन मुख-भंजन खल बरजोरको।

बेद-पुरान-प्रगट पुरुषारथ सकल-सुभट-सिरमोर को ॥ २ ॥

उथपे-थपन,थपे उथपन पन,बिबुधबृंद बँदिछोर को।

जलधि लाँघि दहि लंक प्रबल बल दलन निसाचर घोर को ॥ ३ ॥

जाको बालबिनोद समुझि जिय डरत दिवाकर भोरको।

जाकी चिबुक-चोट चूरन किय रद-मद कुलिस कठोरको ॥ ४ ॥

लोकपाल अनुकूल बिलोकिवो चहत बिलोचन-कोरको।

सदा अभय,जय, मुद-मंगलमय जो सेवक रनरोरको ॥ ५ ॥

भगत-कामतरु नाम राम परिपूरन चंद चकोरको।

तुलसी फल चारो करतल जस गावत गईबहोर को ॥ ६ ॥