श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ३२

हनुमत-स्तुति · राग बिलावल · पद ३२ / २७९

ऐसी तोही न बूझिये हनुमान हठीले।

साहेब कहूँ न रामसे , तोसे न उसीले ॥ १ ॥

तेरे देखत सिंहके सिसु मेंढक लीले।

जानत हौं कलि तेरेऊ मन गुनगन कीले ॥ २ ॥

हाँक सुनत दसकंधके भये बंधन ढीले।

सो बल गयो किधौं भये अब गरबगहीले ॥ ३ ॥

सेवकको परदा फटे तू समरथ सीले।

अधिक आपुते आपुनो सुनि मान सही ले ॥ ४ ॥

साँसति तुलसीदासकी सुनि सुजस तुही ले।

तिहुँकाल तिनको भलौं जे राम-रँगीले ॥ ५ ॥