पद 33
हनुमत-स्तुति · पद 33 / 279
समरथ सुअन समीरके ,रघुबीर-पियारे।
मोपर कीबी तोहि जो करि लेहि भिया रे ॥ 1 ॥
तेरी महिमा ते चलै चिंचिनी-चिया रे।
अँधियारो मेरी बार क्यो,त्रिभुवन-उजियारे ॥ 2 ॥
केहि करनी जन जानिकै सनमान किया रे।
केहि अघ औगुन आपने कर डारि दिया रे ॥ 3 ॥
खाई खोंची माँगि मैं तेरो नाम लिया रे।
तेरे बल,बलि,आजु लौं जग जागि जिया रे ॥ 4 ॥
जो तोसों होतौ फिरौं मेरो हेतु हिया रे।
तौ कयों बदन देखावतो कहि बचन इयारे ॥ 5 ॥
तोसो ग्यान-निधान को सरबग्य बिया रे।
हौं समुझत साई-द्रोहकी गति छार छिया रे ॥ 6 ॥
तेरे स्वामी राम से,स्वामिनी सिया रे।
तहँ तुलसीके कौनको काको तकिया रे ॥ 7 ॥