श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ३७

लक्ष्मण-स्तुति · दण्डक · पद ३७ / २७९

लाल लाडिले लखन , हित हौ जनके।

सुमिरे संकटहारी, सकल सुमंगलकारी ,

पालक कृपालु अपने पनके ॥ १ ॥

धरनी-धरनहार भंजन-भुवनभार ,

अवतार साहसी सहसफनके ॥

सत्यसंध, सत्यब्रत, परम धरमरत ,

निरमल करम बचन अरु मन के ॥ २ ॥

रूपके निधान, धनु-बान पानि,

तून कटि, महाबीर बिदित, जितैया बड़े रनके ॥

सेवक-सुख-दायक, सबल, सब लायक,

गायक जानकीनाथ गुनगनके ॥ ३ ॥

भावते भरत के , सुमित्रा-सीताके दुलारे ,

चातक चतुर राम स्याम घनके ॥

बल्लभ उरमिलाके , सुलभ सनेहबस ,

धनी धन तुलसीसे निरधनके ॥ ४ ॥