श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 38

लक्ष्मण-स्तुति · राग धनाश्री · पद 38 / 279

जयति

लक्ष्मणानंत भगवंत भूधर, भुजगराज, भुवनेश, भूभारहारी।

प्रलय-पावक-महाज्वालमाला-वमन,

शमन-संताप लीलावतारी ॥ 1 ॥

जयति दाशरथि, समर-समरथ, सुमित्रासुवन, शत्रुसूदन, राम-भरत-बंधो।

चारु-चंपक-वरन, वसन-भूषन-धरन,

दिव्यतर, भव्य, लावण्य-सिधों ॥ 2 ॥

जयति गाधेय-गौतम-जनक-सुख-जनक,

विश्व-कंटक-कुटिल-कोटि-हंता।

वचन-चय-चातुरी-परशुधर-गरबहर,

सर्वदा रामभद्रानुगंता ॥ 3 ॥

जयति सीतेश-सेवासरस , बिषयरसनिरस, निरुपाधि धुरधर्मधारी।

विपुलबलमूल शार्दूलविक्रम जलदनाद-मर्दन, महावीर भारी ॥ 4 ॥

जयति संग्राम-सागर-भयंकर-तरन,

रामहित-करण वरबाहु-सेतु।

उर्मिला-रवन, कल्याण-मंगल-भवन,

दासतुलसी-दोष-दवन-हेतू ॥ 5 ॥