श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ३९

भरत-स्तुति · पद ३९ / २७९

जयति

भूमिजा-रमण-पदकंज-मकरंद-रसरसिक-मधुकर भरत भूरिभागी।

भुवन-भूषण, भानुवंश-भूषण, भूमिपालमनि रामचंद्रानुरागी ॥ १ ॥

जयति विबुधेश-धनदादि-दुर्लभ-महाराज-संम्राज-सुख-पद-विरागी।

खड्ग-धाराव्रती-प्रथमरेखा प्रकट

शुद्धमति-युवति पति-प्रेमपागी ॥ २ ॥

जयति निरुपाधि-भक्तिभाव-यंत्रित-ह्रदय ,

बंधु-हित चित्रकुटाद्रि-चारी।

पादुका-नृप-सचिव,पुहुमि-पालक परम

धरम-धुर-धीर, वरवीर भारी ॥ ३ ॥

जयति संजीवनी-समय-संकट हनूमान

धनुबान-महिमा बखानी।

बाहुबल बिपुल परमिति पराक्रम अतुल,

गूढ गति जानकी-जानि जानी ॥ ४ ॥

जयति रण-अजिर गन्धर्व-गण-गर्वहर,

फिर किये रामगुणगाथ-गाता।

माण्डवी-चित्त-चातक-नवांबुद-बरन,

सरन तुलसीदास अभय दाता ॥ ५ ॥