पद ४४
जयति
राज-राजेंद्र राजीवलोचन,राम
नाम कलि-कामतरु,साम-शाली।
अनय-अंभोधि-कुंभज,निशाचर-निकरतिमिर-घनघोर-खरकिरणमाली ॥ १ ॥
जयति मुनि-देव-नरदेव दसरत्थके ,
देव-मुनि-वंद्य किय अवध-वासी।
लोक नायक-कोक-शोक-संकट-शमन,
भानुकुल-कमल कानन-विकासी ॥ २ ॥
जयति शृंगार-सर तामरस-दामदुतिदेह,गुणगेह,विश्वोपकारी ॥ ।३ ॥
सकल सौभाग्य-सौंदर्य-सुषमारुप,
मनोभव कोटि गर्वापहारी ॥ ३ ॥
(जयति) सुभग सारंग सुनिखंग सायक शक्ति,
चारु चर्मासि वर वर्मधारी।
धर्मधुरधीर,रघुवीर,भुजबल अतुल,।
हेलया दलित भूभार भारी ॥ ४ ॥
जयति कलधौत मणि-मुकुट,कुंडल,तिलकझलक भलि भाल,विधु-वदन-शोभा।
दिव्य भूषन,बसन पीत,उपवीत,
किय ध्यान कल्यान-भाजन न को भा ॥ ५ ॥
(जयति)भरत-सौमित्रि-शत्रुघ्न-सेवित,सुमुख,
सचिव-सेवक-सुखद, सर्वदाता ॥
अधम,आरत,दीन,पतित,पातक-पीन
सकृत नतमात्र कहि ’पाहि’ पाता ॥ ६ ॥
जयति जय भुवन दसचारि जस जगमगत,
पुन्यमय,धन्य जय रामराजा।
चरित-सुरसरित कवि-मुख्य गिरि निःसरित,
पिबत,मज्जत मुदित सँत-समाजा ॥ ७ ॥
जयति वर्णाश्रमाचारपर नारि-नर,
सत्य-शम-दम-दया-दानशीला।
विगत दुख-दोष,संतोस सुख सर्वदा,
सुनत,गावत राम राजलीला ॥ ८ ॥
जयति वैराग्य-विज्ञान-वारांनिधे
नमत नर्मद,पाप-ताप-हर्ता।
दास तुलसी चरण शरण संशय-हरण,
देहि अवलंब वैदेहि-भर्ता ॥ ९ ॥