श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ४४

श्रीराम-स्तुति · पद ४४ / २७९

जयति

राज-राजेंद्र राजीवलोचन,राम

नाम कलि-कामतरु,साम-शाली।

अनय-अंभोधि-कुंभज,निशाचर-निकरतिमिर-घनघोर-खरकिरणमाली ॥ १ ॥

जयति मुनि-देव-नरदेव दसरत्थके ,

देव-मुनि-वंद्य किय अवध-वासी।

लोक नायक-कोक-शोक-संकट-शमन,

भानुकुल-कमल कानन-विकासी ॥ २ ॥

जयति श‍ृंगार-सर तामरस-दामदुतिदेह,गुणगेह,विश्वोपकारी ॥ ।३ ॥

सकल सौभाग्य-सौंदर्य-सुषमारुप,

मनोभव कोटि गर्वापहारी ॥ ३ ॥

(जयति) सुभग सारंग सुनिखंग सायक शक्ति,

चारु चर्मासि वर वर्मधारी।

धर्मधुरधीर,रघुवीर,भुजबल अतुल,।

हेलया दलित भूभार भारी ॥ ४ ॥

जयति कलधौत मणि-मुकुट,कुंडल,तिलकझलक भलि भाल,विधु-वदन-शोभा।

दिव्य भूषन,बसन पीत,उपवीत,

किय ध्यान कल्यान-भाजन न को भा ॥ ५ ॥

(जयति)भरत-सौमित्रि-शत्रुघ्न-सेवित,सुमुख,

सचिव-सेवक-सुखद, सर्वदाता ॥

अधम,आरत,दीन,पतित,पातक-पीन

सकृत नतमात्र कहि ’पाहि’ पाता ॥ ६ ॥

जयति जय भुवन दसचारि जस जगमगत,

पुन्यमय,धन्य जय रामराजा।

चरित-सुरसरित कवि-मुख्य गिरि निःसरित,

पिबत,मज्जत मुदित सँत-समाजा ॥ ७ ॥

जयति वर्णाश्रमाचारपर नारि-नर,

सत्य-शम-दम-दया-दानशीला।

विगत दुख-दोष,संतोस सुख सर्वदा,

सुनत,गावत राम राजलीला ॥ ८ ॥

जयति वैराग्य-विज्ञान-वारांनिधे

नमत नर्मद,पाप-ताप-हर्ता।

दास तुलसी चरण शरण संशय-हरण,

देहि अवलंब वैदेहि-भर्ता ॥ ९ ॥