श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 45

श्रीराम-स्तुति · राग गौरी · पद 45 / 279

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।

नवकंज-लोचन,कंज-मुख,कर-कंज,पद कंजारुणं ॥ 1 ॥

कंदर्प अगणित अमित छवि,नवनिल नीरद सुंदरं।

पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ॥ 2 ॥

भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश निकंदनं।

रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं ॥ 3 ॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।

आजानुभुज शर-चाप-धर,संग्राम-जित-खरदूषणं ॥ 4 ॥

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनं।

मम ह्रदय कंज निवास करु कामादि खल-दल-गंजनं ॥ 5 ॥