श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 46

श्रीराम-स्तुति · राग रामकली · पद 46 / 279

सदा

राम जपु,राम जपु,राम जपु, राम जपु, राम जपु, मूढंअन बार बारं।

सकल सौभाग्य-सुख-खानि जिय जानि शठ,मानि विश्वास वद वेदसारं ॥

कोशलेन्द्र नव-नीलकंजाभतनु,मदन-रिपु-कंजह्रदि-चंचरीकं।

जानकीरवन सुखभवन भुवनैकप्रभु,समर-भंजन,परम कारुनीकं ॥ 2 ॥

दनुज-वन धूमधुज,पीन आजानुभुज,दंड-कोदंडवर चंड बानं।

अरुनकर चरण मुख नयन राजीव,गुन-अयन,बहु मयन-शोभा-निधानं ॥ 3 ॥

वासनावृंद-कैरव-दिवाकर, काम-क्रोध-मद कंज-कानन-तुषारं।

लोभ अति मत्त नागेंद्र पंचानन भक्तहित हरण संसार-भारं ॥ 4 ॥

केशवं,क्लेशहं,केश-वंदित पद-द्वंद्व मंदाकिनी-मूलभूतं।

सर्वदानंद-संदोह,मोहापहं, घोर-संसार-पाथोधि-पोतं ॥ 5 ॥

शोक-संदेह-पाथोदपटलानिलं , पाप-पर्वत-कठिन-कुलिशरूपं।

संतजन-कामधुक-धेनु,विश्रामप्रद, नाम कलि-कलुष-भंजन अनूपं ॥ 6 ॥

धर्म-कल्पद्रुमाराम, हरिधाम-पथि संबलं , मूलमिदमेव एकं।

भक्ति-वैराग्यं विज्ञान-शम-दान-दम, नाम आधीन साधन अनेकं ॥ 7 ॥

तेन तप्तं,हुतं,दत्तमेवाखिलं , तेन सर्व कृतं कर्मजालं।

येन श्रीरामनामामृतं पानकृतमनिशमनवद्यमवलोक्य कालं ॥ 8 ॥

श्वपच,खल,भिल्ल,यवनादि हरिलोकगत, नामबल विपुल मति मल न परसी।

त्यागि सब आस,संत्रास,भवपास असि निसित हरिनाम जपु दासतुलसी ॥