पद ४८
श्रीराम-स्तुति · पद ४८ / २७९
हरति सब आरती आरती रामकी।
दहन दुख-दोष,निरमूलिनी कामकी ॥ १ ॥
सुरभ सौरभ धूप दीपबर मालिका।
उड़त अघ-बिहँग सुनि ताल करतालिका ॥ २ ॥
भक्त-ह्रदि-भवन, अज्ञान-तम-हारिनी।
बिमल बिग्यानमय तेज-बिस्तारिनी ॥ ३ ॥
मोह-मद-कोह-कलि-कंज-हिमजामिनी।
मुक्तिकी दूतिका,देह-दुति दामिनी ॥ ४ ॥
प्रनत-जन-कुमुद-बन-इंदु-कर-जालिका।
तुलसि अभिमान-महिषेस बहु कालिका ॥ ५ ॥