श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 48

हरति सब आरती आरती रामकी।

दहन दुख-दोष,निरमूलिनी कामकी ॥ 1 ॥

सुरभ सौरभ धूप दीपबर मालिका।

उड़त अघ-बिहँग सुनि ताल करतालिका ॥ 2 ॥

भक्त-ह्रदि-भवन, अज्ञान-तम-हारिनी।

बिमल बिग्यानमय तेज-बिस्तारिनी ॥ 3 ॥

मोह-मद-कोह-कलि-कंज-हिमजामिनी।

मुक्तिकी दूतिका,देह-दुति दामिनी ॥ 4 ॥

प्रनत-जन-कुमुद-बन-इंदु-कर-जालिका।

तुलसि अभिमान-महिषेस बहु कालिका ॥ 5 ॥