श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ४९

श्रीराम-स्तुति · हरिशंकरी पद · पद ४९ / २७९

देवदनुज-बन-दहन,गुन-गहन,गोविंद नंदादि-आनंद-दाताऽविनाशी।

शंभु,शिव,रुद्र,शंकर,भयंकर,भीम,घोर,तेजायतन,क्रोध-राशी ॥ १ ॥

अनँत,भगवंत-जगदंत-अंतक-त्रास-शमन,श्रीरमन,भुवनाभिरामं।

भूधराधीश जगदीश ईशान,विज्ञानघन,ज्ञान-कल्यान-धामं ॥ २ ॥

वामनाव्यक्त,पावन,परावर,विभो,प्रकट परमातमा,प्रकृति-स्वामी।

चंद्रशेखर,शूलपाणि,हर,अनघ,अज,अमित,अविछिन्न,वृशभेश-गामी ॥ ३ ॥

नीलजलदाभ तनु श्याम,बहु काम छवि राम राजीवलोचन कृपाला।

कबुं-कर्पूर-वपु धवल,निर्मल मौलि जटा,सुर-तटिनि,सित सुमन माला ॥ ४ ॥

वसन किंजल्कधर,चक्र-सारंग-दर-कंज-कौमोदकी अति विशाला।

मार-करि-मत्त-मृगराज,त्रैनैन,हर,नौमि अपहरण संसार-जाला ॥ ५ ॥

कृष्ण,करुणाभवन,दवन कालीय खल,विपुल कंसादि निर्वशकारी।

त्रिपुर-मद-भंगकर,मत्तगज-चर्मधर,अन्धकोरग-ग्रसन पन्नगारी ॥ ६ ॥

ब्रह्म,व्यापक,अकल,सकल,पर,परमहित,ग्यान,गोतीत,गुण-वृत्ति-हर्त्ता।

सिंधुसुत-गर्व-गिरि-वज्र,गौरीश,भव दक्ष-मख अखिल विध्वंसकर्त्ता ॥ ७ ॥

भक्तिप्रिय,भक्तजन-कामधुक धेनु,हरि हरण दुर्घट विकट विपति भारी।

सुखद,नर्मद,वरद,विरज,अनवघ्यऽखिल,विपिन-आनंद-वीथिन-विहारी

रुचिर हरिशंकरी नाम-मंत्रावली द्वंद्वदुख हरनि,आनंदखानी।

विष्णु-शिव-लोक-सोपान-सम सर्वदा वदति तुलसीदास विशद बानी ॥ ८ ॥