पद 6
शिव स्तुति · राग रामकली · पद 6 / 279
जाँचिये गिरिजापति कासी। जासु भवन अनिमादिक दासी ॥ 1 ॥
औढर-दानि द्रवत पुनि थोरें। सकत न देखि दीन करजोरे ॥ 2 ॥
सुख-संपति,मति-सुगति सुहाई। सकल सुलभ संकर-सेवकाई ॥ 3 ॥
गये सरन आरतिकै लीन्हे। निरखि निहाल निमिषमहँ कीन्हे ॥ 4 ॥
तुलसिदास जाचक जस गावै। बिमल भगति रघुपतिकी पावै ॥ 5 ॥