पद 7
शिव स्तुति · पद 7 / 279
कस न दीनपर द्रवहु उमाबर। दारुन बिपति हरन करुनाकर ॥ 1 ॥
बेद-पुरान कहत उदार हर। हमरि बेर कस भयेहु कृपिनतर ॥ 2 ॥
कवनि भगति कीन्ही गुननिधि द्विज। होइ प्रसन्न दीन्हेहु सिव पद निज ॥ 3 ॥
जो गति अगम महामुनि गावहिं। तव पुर कीट पतंगहु पावहिं ॥ 4 ॥
देहु काम-रिपु ! राम -चरन-रति। तुलसिदास प्रभु ! हरहु भेद-मति ॥ 5 ॥