श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 7

कस न दीनपर द्रवहु उमाबर। दारुन बिपति हरन करुनाकर ॥ 1 ॥

बेद-पुरान कहत उदार हर। हमरि बेर कस भयेहु कृपिनतर ॥ 2 ॥

कवनि भगति कीन्ही गुननिधि द्विज। होइ प्रसन्न दीन्हेहु सिव पद निज ॥ 3 ॥

जो गति अगम महामुनि गावहिं। तव पुर कीट पतंगहु पावहिं ॥ 4 ॥

देहु काम-रिपु ! राम -चरन-रति। तुलसिदास प्रभु ! हरहु भेद-मति ॥ 5 ॥