पद ६६
श्रीराम-स्तुति · पद ६६ / २७९
राम जपु,राम जपु, राम जपु बावरे।
घोर भव-नीर-निधि नाम निज नाव रे ॥ १ ॥
एक ही साधन सब रिद्धि-सिद्धि साधि रे।
ग्रसे कलि-रोग जोग-संजम-समाधि रे ॥ २ ॥
भलो जो है,पोच जो है,दाहिनो जो,बाम रे।
राम-नाम ही सों अंत सब ही को काम रे ॥ ३ ॥
जग नभ-बाटिका रही है फलि फूलि रे।
धुवाँ कैसे धौरहर देखि तू न भूलि रे ॥ ४ ॥
राम-नाम छाड़ि जो भरोसो करै और रे।
तुलसी परोसो त्यागि माँगै कूर कौर रे ॥ ५ ॥