श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 72

मेरो भलो कियो राम आपनी भलाई।

हौं तो साई-द्रोही पै सेवक-हित साई ॥ 1 ॥

रामसों बड़ो है कौन, मोसों कौन छोटो।

राम सो खरो है कौन, मोसों कौन खोटो ॥ 2 ॥

लोक कहै रामको गुलाम हौं कहावौं।

एतो बड़ो अपराध भौ न मन बावौं ॥ 3 ॥

पाथ माथे चढ़े तृन तुलसी ज्यों नीचो।

बोरत न बारि ताहि जानि आपु सीचो ॥ 4 ॥