श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ७७

श्रीराम-स्तुति · पद ७७ / २७९

जानकी-जीवन,जग-जीवन,जगत-हित,

जगदीस,रघुनाथ,राजीवलोचन राम।

सरद-बिधु-बदन,सुखसील,श्रीसदन,

सहज सुंदर तनु,सोभा अगनित काम ॥ १ ॥

जग-सुपिता,सुमातु,सुगुरु,सुहित,सुमीत,

सबको दाहिनो,दीनबन्धु,काहुको न बाम।

आरतिहरन,सरनद,अतुलित दानि,

प्रनतपालु,कृपालु,पतित-पावन नाम ॥ २ ॥

सकल बिस्व-बंदित,सकल सुर-सेवित,

आगम-निगम कहैं रावरेई गुनग्राम।

इहै जानि तुलसी तिहारो जन भयो,

न्यारो कै गनिबो जहाँ गने गरीब गुलाम ॥ ३ ॥