पद 78
श्रीराम-स्तुति · राग टोडी · पद 78 / 279
देवदीनको दयालु दानि दूसरो न कोऊ।
जाहि दीनता कहौं हौं देखौं दीन सोऊ ॥ 1 ॥
सुर,नर,मुनि,असुर,नाग,साहिब तौ घनेरे।
(पै) तौ लौं जौं लौं रावरे न नेकु नयन फेरे ॥ 2 ॥
त्रिभुवन,तिहुँ काल बिदित,बेद बदति चारी।
आदि-अंत-मध्य राम! साहबी तिहारी ॥ 3 ॥
तोहि माँगि माँगनो न माँगनो कहायो।
सुनि सुभाव-सील-सुजसु जाचन जन आयो ॥ 4 ॥
पाहन-पसु, बिटप-बिहँग अपने करि लीन्हे।
महाराज दसरथके ! रंक राय कीन्हे ॥ 5 ॥
तू गरीबको निवाज, हौं गरीब तेरो।
बारक कहिये कृपालु! तुलसिदास मेरो ॥ 6 ॥