श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 79

देवतू दयालु ,दीन हौं तू दानि, हौं भिखारी।

हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप-पुंज-हारी ॥ 1 ॥

नाथ तू अनाथको, अनाथ कौन मोसो

मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो ॥ 2 ॥

ब्रह्म तू, हौं जीव, तू है ठाकुर,हौं चेरो।

तात-मात,गुरु-सखा, तू सब बिधि हितु मेरो ॥ 3 ॥

तोहिं मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै।

ज्यों त्यों, तुलसी कृपालु ! चरन-सरन पावै ॥ 4 ॥