पद 79
श्रीराम-स्तुति · पद 79 / 279
देवतू दयालु ,दीन हौं तू दानि, हौं भिखारी।
हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप-पुंज-हारी ॥ 1 ॥
नाथ तू अनाथको, अनाथ कौन मोसो
मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो ॥ 2 ॥
ब्रह्म तू, हौं जीव, तू है ठाकुर,हौं चेरो।
तात-मात,गुरु-सखा, तू सब बिधि हितु मेरो ॥ 3 ॥
तोहिं मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै।
ज्यों त्यों, तुलसी कृपालु ! चरन-सरन पावै ॥ 4 ॥