पद 80
श्रीराम-स्तुति · पद 80 / 279
देव–
और काहि माँगिये, को माँगिबो निवारै।
अभिमतदातार कौन, दुख-दरिद्र दारै ॥ 1 ॥
धरमधाम राम काम-कोटि-रूप रूरो।
साहब सब बिधि सुजान, दान-खडग-सूरो ॥ 2 ॥
सुसमय दिन द्वै निसान सबके द्रार बाजै।
कुसमय दसरथके ! दानि तैं गरीब निवाजै ॥ 3 ॥
सेवा बिनु गुनबिहीन दीनता सुनाये।
जे जे तैं निहाल किये फूले फिरत पाये ॥ 4 ॥
तुलसीदास जाचक-रुचि जानि दान दीजै।
रामचंद्र चंद्र तू, चकोर मोहिं कीजै ॥ 5 ॥