श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 80

देव–

और काहि माँगिये, को माँगिबो निवारै।

अभिमतदातार कौन, दुख-दरिद्र दारै ॥ 1 ॥

धरमधाम राम काम-कोटि-रूप रूरो।

साहब सब बिधि सुजान, दान-खडग-सूरो ॥ 2 ॥

सुसमय दिन द्वै निसान सबके द्रार बाजै।

कुसमय दसरथके ! दानि तैं गरीब निवाजै ॥ 3 ॥

सेवा बिनु गुनबिहीन दीनता सुनाये।

जे जे तैं निहाल किये फूले फिरत पाये ॥ 4 ॥

तुलसीदास जाचक-रुचि जानि दान दीजै।

रामचंद्र चंद्र तू, चकोर मोहिं कीजै ॥ 5 ॥