पद 84
श्रीराम-स्तुति · पद 84 / 279
तौ तू पछितैहै मन मींजि हाथ।
भयो है सुगम तोको अमर-अगम तन,समुझिधौं कत खोवत अकाथ ॥ 1 ॥
सुख-साधन हरिबिमुख बृथा जैसे श्रम फल घृतहित मथे पाथ।
यह बिचारि, तजि कुपथ-कुसंगति चलि सुपंथ मिलि भले साथ ॥ 2 ॥
देखु-राम-सेवक, सुनि कीरति, रटहि नाम करि गान गाथ।
हृदय आनु धनुबान-पानि प्रभु,लसे मुनिपट, कटि कसे भाथ ॥ 3 ॥
तुलसिदास परिहरि प्रपंच सब, नाउ रामपद-कमल माथ।
जनि डरपहि तोसे अनेक खल, अपनाये जानकीनाथ ॥ 4 ॥