अयोध्याकाण्ड — 10 सुविधाजनक भागों में। प्रत्येक चौपाई, दोहा, सोरठा एवं छन्द के साथ हिन्दी भावार्थ।
भाग 1यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके …भाग 2होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न …भाग 3ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न …भाग 4पद पखारि जलु पान करि आपु …भाग 5यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे …भाग 6मातु भरत के बचन सुनि साँचे …भाग 7प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि …भाग 8बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु …भाग 9प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो …भाग 10भरत बिमल जसु बिमल बिधु सुमति …