ॐ
श्री रामायण मन्दिर
माधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
मुखपृष्ठ
मन्दिर
परिचय
बरेली (माधवबाड़ी)
विकासनगर, देहरादून
मन्दिर का इतिहास
गुरु परम्परा
रामायण एवं ग्रन्थ
रामायण एवं ग्रन्थ
श्रीरामचरितमानस
सुन्दरकाण्ड
तुलसी चरित (कथा)
विनय पत्रिका
भक्ति
भक्ति संग्रह
भजन
आरती
छन्द
स्तुति
पाठ
नित्य कर्म
उत्सव
सेवा
संपर्क
अयोध्याकाण्ड
श्रीरामचरितमानस · सम्पूर्ण मूल एवं भावार्थ
होम
»
रामायण एवं ग्रन्थ
»
श्रीरामचरितमानस
» अयोध्याकाण्ड
अयोध्याकाण्ड — १० सुविधाजनक भागों में। प्रत्येक चौपाई, दोहा, सोरठा एवं छन्द के साथ हिन्दी भावार्थ।
भाग १
यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके …
भाग २
होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न …
भाग ३
ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न …
भाग ४
पद पखारि जलु पान करि आपु …
भाग ५
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे …
भाग ६
मातु भरत के बचन सुनि साँचे …
भाग ७
प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि …
भाग ८
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु …
भाग ९
प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो …
भाग १०
भरत बिमल जसु बिमल बिधु सुमति …
← सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस (सप्त काण्ड)