श्रीरामचरितमानस के पंचम सोपान सुन्दरकाण्ड में हनुमान जी की समुद्र-लंघन से लेकर लंका-दहन तथा सेतु-निर्माण के मार्गदर्शन तक की सम्पूर्ण कथा आती है। यहाँ यह कथा 13 भागों में क्रमबद्ध की गयी है। सम्पूर्ण मूल पाठ (चौपाई-दोहा सहित) के लिए कृपया गीताप्रेस, गोरखपुर के मूल ग्रन्थ का अवलोकन करें।
सुन्दरकाण्ड, श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान, वहीं से आरम्भ होता है जहाँ वानर-सेना सीता जी क…
आकाश-मार्ग से जाते हुए हनुमान जी की परीक्षा लेने देवताओं के कहने पर नागमाता सुरसा उनके सम्…
समुद्र पार कर हनुमान जी लंका नगरी के समीप पहुँचते हैं। स्वर्ण-प्राचीरों से घिरी, अत्यन्त स…
लघु रूप धारण कर हनुमान जी रात्रि में लंका के भवन-भवन में सीता जी को खोजते हैं। वे रावण के …
हनुमान जी जब वृक्ष पर छिपे हुए हैं, उसी समय रावण अनेक स्त्रियों के साथ अशोक वाटिका में सीत…
रावण के जाने के बाद राक्षसियाँ सीता जी को भाँति-भाँति से डराने लगती हैं। इसी बीच त्रिजटा न…
मुद्रिका पर अंकित श्रीराम-नाम पहचानकर सीता जी के मन में हर्ष और विस्मय दोनों उमड़ पड़ते है…
सीता जी से विदा लेने के बाद हनुमान जी को भूख लगती है। वे सोचते हैं कि लंका की कुछ और परीक्…
बँधे हुए हनुमान जी को राक्षस रावण की भरी सभा में ले आते हैं। निर्भयतापूर्वक हनुमान जी रावण…
राक्षस हनुमान जी की पूँछ में वस्त्र लपेटकर उसमें तेल डालते हैं और आग लगा देते हैं। हनुमान …
लंका से लौटते समय हनुमान जी मार्ग में मधुवन में रुकते हैं, जहाँ सुग्रीव के मधुर फल रखे हुए…
लंका दहन के पश्चात रावण अपनी सभा में मन्त्रणा करता है। विभीषण जी उसे बार-बार समझाते हैं कि…
समुद्र-तट पर पहुँचकर श्रीराम वानर-सेना के साथ इस विषय में विचार करते हैं कि विशाल समुद्र क…